*_!! श्रीएकादशी महत्त्व!!_*
*_!! श्रीएकादशी !!_* एकादशी व्रत भगवान् को अत्यंत प्रिय है हम संसारी जीवों को संसार चक्र से छुड़ाने के लिये भगवान् ने ही इस तिथि को प्रकट किया था , इस लिये मनुष्य मात्र को इस व्रत का पालन करना चाहिये । पद्म पुराण के उत्तर खण्ड में इस व्रत के सम्बंध में विस्तृत चर्चा प्राप्त होती है । श्रीमहादेव जी से श्रीपार्वती जी इस विषय में प्रश्न करतीं हैं और श्रीमहादेव जी इसका उत्तर देते हैं जिसमें बड़े ही स्पष्ट शब्दों में एकादशी की उपादेयता प्रतिपादित की गयी है । किसी समय पापपुरुष भगवान् के पास जाकर रोने लगा कि हे नाथ ! संसार के किसी व्रत नियम प्रायश्चित से मुझे भय नहीं है । लेकिन प्रभु एकादशी से मुझे महान भय प्राप्त होता है प्रभु उस दिन मुझे कहीं स्थान प्राप्त नहीं होता आप कृपा कर मुझे स्थान प्रदान करें । तब श्रीप्रभु बोले हे पाप पुरुष ! तुम एकादशी के दिन अन्न में वास करो - *_अन्नमाश्रित्य तिष्ठन्तं भवन्तं पापपूरुषम् ।।_* (प०पु०क्रि०२२/४९) ...